पहली मुलाकात
अपने बचपन में कातरीना प्रार्थना करती थी कि परमेश्वर उसे ऐसी कलीसिया में ले जाए जहाँ उसे स्वीकार किया जाए। एक जवान के रूप में वह प्रभु भोज के लिए कैथोलिक कलीसिया में गई। रोमन कैथोलिक रीति-रिवाजों में से कई उसे विचित्र लगे। उसे यह तथ्य अच्छा लगा आया कि वे समूचे संसार में एक ही तरह की आराधना रीति का पालन करते हैं। उसे लगने लगा कि यह एक अद्भुत आश्चर्यकर्म है कि हर बार प्रभु भोज यीशु की देह और लहू बन जाता है, ताकि लोग यीशु से जुड़ सकें।