पाठ के उद्देश्य
इस पाठ के अन्त होने तक विद्यार्थी को नीचे दिए गए कार्य करने के योग्य होना चाहिए:
(1) आराधना की अगुआई करने के लिए आत्मिक रूप से तैयार होने के महत्व को पहचानना।
(2) आराधना सभाओं में संरचना और विषय की भूमिका को समझना।
(3) संतुलित आराधना सभाओं की योजना बनाना जो मसीह की पूरी देह से बात करे।
(4) एक आराधना अगुए में आवश्यक गुणों की सराहना करना।
(5) आराधना की अगुआई और चालाकी से प्रभावित के बीच अंतर करना।
(6) प्रभावशाली आराधना की अगुआई के लिए व्यावहारिक कदम लागू करना।


